







एक बेहतरीन शायर राशिद अली खान की शायरी से सजी खूबसूरत किताब “मुख्तसर ख़्याल” पहली किताब मुम्बई के जुहू होटल में लांच की गई तो यहां उनके दोस्त ऎक्टर सज्जाद, कम्पोज़र सिंगर शाज़ी सहित कई मेहमान मौजूद थे। हिंदी में यह किताब बड़ी ही सुंदरता के साथ प्रकाशित की गई है। इस बुक लांच के अवसर पर ग़ज़ल की एक महफ़िल भी पेश की गई और राशिद अली खान के कलाम को शाज़ी ने बड़ी खूबसूरती से कम्पोज़ किया और गाया। इस दौरान राशिद अली खान ने अपनी शायरी भी पढ़कर सुनाई जिसे सभी ने खूब पसन्द किया। उनकी आवाज़ बड़ी प्रभावी है और शेर पढ़ने का उनका अंदाज श्रोताओं और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है।
राशिद अली खान ने फौज में अपनी सेवाएं दी हैं और अपने तमाम अनुभवों को अपनी शायरी में पेश कर दिया है। उन्होंने देशभक्ति के जज़्बात को अपनी एक नज़्म “ऐ वतन” में पेश किया है। वह लिखते हैं “मेरी दौलत है वतन, मेरी शोहरत है वतन, मेरे माथे का नूर है, मेरे दिल का सुरूर है…।”
बुक लांच के अवसर पर राशिद अली खान ने बताया कि इस किताब में उनकी एक रचना “फ़साना” के नाम से है जिसमें मुख़्तसर शब्द आया है। शेर कुछ यूं है “तेरा मेरा जैसा भी था फसाना अच्छा था, मुख़्तसर ही सही पर वो ज़माना अच्छा था।”
राशिद अली खान ने यहां मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी यह पहली किताब “मुख़्तसर ख़्याल” उनकी ज़िंदगी के ख्याल हैं जिसे उन्होंने मुख़्तसर (कम) शब्दों में पेश कर दिए हैं। मेरे दिल मे जो ख्याल आता है मैं उसे कागज़ पर उतार देता हूं। फिर शाज़ी उस शायरी को तराशती हैं, उन्हें कम्पोज़ करती हैं।
राशिद अली खान भविष्य में और भी किताबे लाने का इरादा रखते हैं। उन्हें शायरी का शौक है और वह इसे जुनून की हद तक चाहते हैं। उनकी शायरी में उर्दू और हिंदी शब्दों का अनूठा संगम नजर आता है जो शायरी पढ़ने वालों के लिए एक उपहार स्वरूप है।